13/05/09

शान्ति के लिए कोई डिस्टर्ब करने वाला चाहिए


तुम्हारे जाने से घर बहुत सूना है
सोचता था कुछ दिन तुम नही रहोगे
तो घर में उथल-पुथल नही रहेगी
मैं कुछ खास लिख सकूंगा
लेकिन ७ दिनों से कुछ न लिख सका
तुम्हारे जो प्लास्टिक के
हाथी, घोडे, हिरन, जिराफ, बकरी, कछुए
मेरी परेशानी का कारण बनते थे
रात में बेड पर चुभते थे
वह सब औंधे मुंह पड़े हैं
कुछ मेरे बेड, मेज और फ्रिज के ऊपर पड़े हैं
ढेर सारे अलमारी में बहुत से आड़े-तिरछे पड़े हैं
वह सब मुझे सोने नही देते
जगाता हूँ उन्हें बार-बार इसलिए कि वे उदास न लगे
वे कभी-कभी भूखे लगते हैं प्यासे भी
मैं चाहता हूँ उन्हें नज़रंदाज करके ख़ुद खा लूँ
खाता हूँ तो पेट नही भरता
सोता हूँ तो नींद नहीं आती
लिखने-पढ़ने बैठता हूँ तो मन नहीं लगता
दिन भर ऑफिस में रहने के बाद घर आता हूँ तो घर उदास लगता है
तुम्हारी याद आती है
काश तुम होते
ये जानवर खुशहाल लगते
तुम इनके साथ मिलकर मुझे डिस्टर्ब करते
तन परेशान होता लेकिन मन उदास न होता
अब समझ गया हूँ एकांत कि अर्थ
अकेला होकर एकांत नही मिलाता
एकांत के लिए समाज चाहिए
शान्ति के लिए कोई डिस्टर्ब करने वाला चाहिए
(अपने बेटे धरातल को याद करते हुए)
-रोशन प्रेमयोगी



25/04/09

जब तुम इनमे से कुछ गुनगुनाओगे



मै आपको चाँद तोड़कर तो नही दे सकता


मै अपने हाथों से ईंट भी नही तोड़ सकता


मैं नदी की धारा नही मोड़ सकता


फ़िर भी मैं बहुत कुछ केर सकता हूँ


मैं आपको चाँद का सपना दिखा सकता हूँ


मैं आपके सपनों की परवरिश कर सकता हूँ


मैं बता सकता हूँ कल्पना में यथार्थ कितना है


यथार्थ में झूठ कितना है


मैं सिखा सकता हूँ अपने सुख को कैसे बांटो


मैं बता सकता हूँ अपने दुःख को कैसे एन्जॉय करो


लेकिन यह मत सोचो मेरे पास कोई जादुई छड़ी है


या फ़िर समय को कंट्रोल कराने वाली घड़ी है


मेरे पास सिर्फ़ रास्ते हैं


जो तुम्हारी मंजिल तक भी जाते हैं


मेरे पास सपने हैं


जो तुम्हारे दिल तक जाते हैं


मेरे पास एक आईना है


जिसमे देखकर अपना चेहरा


तुम गुनगुना सकते हो कोई प्रेम गीत


कोई भजन


कोई निर्गुण


जब तुम इनमे से कुछ गुनगुनाओगे


मुझे कोई सुरीला साज़ बजाते पाओगे


-रोशन प्रेमयोगी

23/03/09

कोई पतवार गढो फ़िर से


कोई उम्मीद करो ख़ुद से

कोई रास्ता तलाशो ख़ुद से

कोई पतवार गढो ख़ुद से

कोई नाव बनाओ खुसे

कभी गंगा में जाओ ख़ुद से

कभी रेत से नहाओ ख़ुद से

कभी पानी लुटाओ ख़ुद से

कभी डुबकी लगाओ ख़ुद से

तुम्हे भी मंजिल मिल जायेगी

सफलता तुम्हारे भी हाथ आयेगी

न भी आए तो उदास मत हो

एक बार मुस्कुराओ ख़ुद से

अपनी असफलता को स्वीकार करो

एक बार

नयी उम्मीद करो ख़ुद से

कोई पतवार गढो फ़िर से

कोई नाव चलाओ फ़िर से

-रोशन प्रेमयोगी

14/03/09

तुम्हारा प्यार फूल बन जय



जो चाहते हो


तुम्हारा प्यार फूल बन जय


काँटों को भी महकाए


जो चाहते हो


तुम्हारा प्यार हवा बन जाए


pahadhon को भी sheetalata pahunchaye
जो चाहते हो


तुम्हारा प्यार pani बन जाए


aasaman की भी pyas bujheye


जो चाहते हो


तुम्हारा प्यार rooh बन जाए


कृष्ण भी उसे pane को lalachye


to milo vidhya शर्मा से


jinka प्यार nihal है


परिवार khushahal है


(vidhya mere naye upanyas FOUNTEN LOVE ki main kirdar hain)


-रोशन premyogi



09/03/09

होली मेरे लिए सपना है






मुझे पसंद है पीला रंग



पीली कनेर की तरह हो जो भीनी खुशबू वाला



जिसमे हो एक सपना एक प्यार एक मर्यादा



एक उमँग एक तरंग



मुझे पसंद है सपना को देखना



मुझे पसंद है सपना से प्यार करना



मुझे पसंद है कनेर का फूल देखना



मुझे पसंद है पीला रंग



अजीब बात यह है मैं कनेर सा पीला रंग खेलना चाहता हूँ



जिसमे भीनी खुशबू हो



जो बाजार में नही मिलाता



सो मैं सपना से खेलता हूँ रंग



फूलों को देख मन में भर लेता हूँ उमँग



होली मेरे लिए सपना है



होली मेरे लिए पीली कनेर है



होली मेरे लिए मन की उमँग है



होली मेरे लिए गीत है



जिसे केवल याद करता हूँ गाता नही



क्यों की मेरा सुर नहीं अच्छा है



वैसे भी मुझे केवल गुनगुनाना अच्छा लगता है



क्योंकी मई नही चाहता की लोग जान लें की



रोशन को येही गीत पसंद है



लोग यह जान लेंगे तो नज़र लगा देंगे



-रोशन प्रेमयोगी



04/03/09

जिन्हें रिश्ते नहीं मिलते

जिन्हें रिश्ते नहीं मिलते

उन्हें गैरों ने पाला है

वे हर मौसम में खिलते हैं

ऐसे रंगों में ढाला है

-रोशन प्रेमयोगी

उजाले की तलाश

कल जब शाम ढल रही थी
मेरी पलको तले था एक सपना
थोड़े अंधेरे में
उजाला तलाश रहा था सपने में
सुबह से ही नही थी बिजली
जब मै था उजाले के बेहद करीब
अचानक जल गया बल्ब
टूट गया सपना बुझ गया प्रकाश
कल जब शाम ढल रही थी
बहुत याद आयी तुम्हारी
अगर तुम होती घर में बल्ब न जलाता
खली पंखा चलता
बड़ा होता मेरा सपना
हासिल कर लेता मै प्रकाश

14/02/09

इस गली में गुलाब हैं साहिब


बड़ी मुश्किल से घर से निकला मै शहर के लिए

वसंत ने रोक लिया, कहा,

बाग देख तो लो।

उसकी आरजू थी, फिर हुई मेरी मर्जी

बहुत घूमा, बहुत कुछ देखा

किसी ने रोका नही, ख़ुद से मैं रुका भी नही

प्यार क्या चीज है बता दूँ कैसे

एक एहसास है दिल में कहो बतला दूँ,

पाँव के काँटों ने एहसास कराया है साहिब

इस गली में गुलाब हैं साहिब।

-रोशन प्रेमयोगी

12/02/09

यह प्यार

जब मैं बच्चा था
तब भी जवान था प्यार
जब मैं जवान हूँ
तब भी युवा है प्यार
जब मैं बूढा हो जाऊँगा
तब भी जवान रहेगा प्यार
मानव स्वभाव
झुंझलाता हूँ'
आखिर क्यों नहीं मेरे साथ
बूढा हो जाता
यह प्यार
-रोशन प्रेमयोगी

30/01/09

कैसे निकाल पाओगे यादों के सागर से

उदास रातों में मै सपना बनकर आऊंगा

धूप में निकालोगे तो बादल बन जाऊंगा

तुम मुझे कैसे निकाल पाओगे यादों के सागर से

जब भी पाँव उतारोगे नाव से किनारे बांहे फैलाये नज़र आऊंगा

-रोशन प्रेमयोगी

15/01/09

बात कुछ जल्द शुरू हो तो बात होती है

बात कुछ जल्द शुरू हो तो बात होती है
बात से बात बन जाए तो बात होती है
बात की क़द्र करते हो तो बातूनी न बनो
बात यदि अहमियत रखे तो बात होती है
-रोशन प्रेमयोगी